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माँ…(On Mother’s Day)

Posted On 30 Apr, 2012 Others में

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माँ…(On Mother’s Day)

माँ ! क्या है ये माँ? “…. जन्म देने वाली “माँ”… इसलिए उसे “जननी” भी कहा गया है. ऐसे तो माँ कोई नयी चीज़ नहीं है, “माँ” शब्द का अर्थ सिर्फ जन्म देने में निहित नहीं है…परन्तु उसका अर्थ बहुत गहरा व् अलग-अलग व्यक्ति के नजरिये  से नया व् भिन्न है. ये कहना अतिसंयोक्ति नहीं होगी कि .. ” माँ बिना ये संसार असंभव था.

माँ तो माँ है…चाहे वह माता कौशल्या हो, माता यशोदा हो, माता मरियम हो, या हम में से कोई भी हो. हमारे ह्रदयों में बच्चे के लिए प्यार, ममता व्  प्रार्थनाओ के सिवा कुछ नहीं होता. माँ वो है जो अपने बच्चे को नौ महीने अपने गर्भ में रखती है, उसे जन्म देती है, पालती पोसती है, व् सदा ईश्वर से उसके लिए सफलताओं व अच्छे स्वास्थ के प्रार्थना करती है. जीवन के हर अच्छे व् बुरे क्षणों में उसके साथ रहती है. बच्चे की  सफलताओं से ईर्ष्या नहीं करती. उसके हाथ सदा अपने बच्चे को आशीर्वाद देने के लिए उठते है. उसके जीवन का हर प्रयास कही न कही, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बच्चे के हित में ही होता है.

वह माँ ही है, जो नौ महीने कि गर्भवस्था को जीवन का सुख समझ कर ख़ुशी से व्यतीत करती है. भयानक प्रसव पीड़ा से गुज़र कर भी बच्चे का मुह देखकर खुश हो जाती है. बच्चे की  सुविधा के लिए गीले पर सोया करती है और बच्चे को सूखे बिस्तर पर सुलाया करती है . धूप में अपने अंचल को फैलाकर उसके लिए छाया करती है. रात-रात भर जाग कर उसे सुलाने कि कोशिश किया करती है . उसके बीमार होने पर खुद बीमारी महसूस किया करती है, अपने खाने-पीने का वक़्त भूलकर, भूखी रहकर, बच्चे को दूध पिलाना कभी नहीं भूलती . हर रोज़ बच्चे में नया परिवर्तन व् विकास देख कर खुश हुआ करती है .

अरे!!!! अनचाही संतान पाकर भी माँ के ह्रदय में ममता का बीज फूट पड़ता है. क्योंकि…. वो “माँ” है. माँ तो संसार का एक ऐसा अदभुत  प्राणी है, जो प्यार व् ममता से भरा है…चाहे वह पशु योनी की ही माँ क्यों न हो.  इसके एवज में माँ ने कभी भी किसी भी प्रकार की अपेक्षा नहीं राखी. क्योकि वह माँ है व्यापारी नहीं….

माँ के प्यार को समझने का एक साधारण उदहारण मेरी ज़हन में आ रहा है… जब एक माँ अपने बच्चे का स्तनपान बंद करने की कोशिश करती है तो तमाम कोशिशो के बाद भी वह नाकाम रहती है. उस स्थिति पर कुछ लोग आपना अनुभव  ज्ञान बाटते फिरते है की, “यदि बच्चा रोता है तो रोने दो, भूख लगेगी तो खुद ही खा लेगा”… पर ये बात उन ठेकेदारों के लिए कहना  तो बहुत आसान था, उस माँ के बारे में सोचकर देखिये, जो अपने बच्चे को भूख से रोता बिलकता नहीं देख सकती व् अपनी ममता पर काबू नहीं कर पाती. परिणामतः वह पुनः बच्चे को स्तनपान कराती है व् उसे बंद करने में नाकाम रहती है… ये उसका प्यार  ही है, जो बच्चे को तकलीफ में नहीं देख सकती.

जैसे हमने सुना है कि माँ बच्चे कि पहली शिक्षिका होती है. वह माँ ही है जो बच्चे को बोलना, चलना, खाना, पढना सिखाती है. इसके साथ-साथ जीवन के मूल्यों को समझती है, सदाचार सिखाती है. जीवन में एक अच्छा व्यक्ति बनने की सभी सामग्रियां बच्चे में डालने कि कोशिश करती है. हर माँ अपने सामर्थ्य से बच्चे के लिए ज्यादा ही करती है. चाहे वह माँ अशिक्षित, गरीब या अपाहिज ही क्यों न हो.

माँ ही है जो बच्चे की ख़ुशी से फूली नहीं समाती, और दुःख से बासे  फूल की तरह टूट कर बिखर जाती है, फिर भी बच्चे को संसार में  फूल की ही तरह खिलता व् महकता देखना चाहती है… जीवन की हर चुनौती का सामना करने की ताकत देती है. जीवन के नाज़ुक क्षणों में सहारा भी माँ ही देती है.

माँ के जीवन में सिर्फ एक ही दिन ऐसा होता है, जब वह बच्चे के रोने पर खुद खुश होती है…वो है उस बच्चे के जन्म का दिन… ( पैदा होते ही बच्चे का रोना जो उसके अच्छे स्वास्थ का प्रतीक है.) उस दिन के अलावा माँ हमेशा बच्चे के रोने पर खुद दुखी व् परेशान रहती है..

मेरी कल्पना में घर-परिवार एक बगीचा है, “माँ” उस बगीचे की माली (बागवान) है, और उसकी संतान  उस बगीचे के रंग-बिरंगे फूल है. जिस तरह माली अपने बगीचे के एक-एक फूल के सामान भाव से देखता है और उनका लालन-पालन करता है, ठीक उसी तरह “माँ” भी अपने सभी बच्चों का सामान भाव -दृष्टि से लालन-पालन करके, अपना प्यार व् ममता लुटाती है.

मैंने कुछ लोगो से पूछा कि..”माँ क्या है?”…. इस प्रश्न के जवाब कुछ इस तरह मिले:

1. “भगवान का दूसरा रूप माँ है .”…. शीतल बलाल (Canada)

2. “Being a full-time mother is one of the highest salaried jobs in my field, since the payment is pure love.”…..Mildred (USA)

3. “जिस पल बच्चे का जन्म होता है उसी पल “माँ” का भी जन्म होता है. इसी पल से माँ और बच्चे दोनों का नया सफ़र शुरू होता है.”….. रजनीश त्रिपाठी (India)

4. “यदि मै अपनी माँ को तराजू के एक पल्ले पर और सम्पूर्ण संसार को दूसरे पल्ले पर रख दूं , तो मेरी माँ का पल्ला भारी होगा”…. रितिका शर्मा (India)

5. “आज मै जो हूँ, अपनी माँ के कारण हूँ, मै उनका ऋणी हूँ, जिस ऋण को मै कभी नहीं उतर सकता.”… पंकज बनोटिया (Dubai)

6. “एक माँ का हाथ सहारे के लिए शायद हमेशा न रहे पर उसका आशीर्वाद और प्यार सदा हमारे साथ रहते है.”…. कृति देसाई (UK)

7. “माँ तो माँ है… एक बच्चे के दुःख व् दर्द को एक माँ ही समझ सकती है. जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी से निपटने के लिए एक माँ का आशीर्वाद ही काफी है, जो अनमोल है. “… चेतना जैसवाल (India)

8. “एक माँ का प्यार, भावनाए व् योगदान …एक अभिभावक बनाने पर ही समझ आता है, काश हम उन्हें समय रहते समझ पाते .” ….. अंकित मुंदरा (India)

9. “माँ… ममता का सागर है.” …ऋतू तिवारी (Dubai)

10. “माँ  का  प्यार व्  योगदान माँ बनकर  ही समझा जा सकता है, वरना माँ शब्द का अर्थ शब्दों में बयाँ कर पाना संभव नहीं है.”… नीलम मजीठिया (Australia)

11. “तेरी  खुशिओयों  के  लिए ,जो  अपनी  खुशियाँ  खोती  है …..वो …..माँ  होती  है “…. पुष्पा कटकवार  (India)

12. “Mother is a person who will guide you all your life, she will always be there for you and love you no matter what. Sometimes we don’t realize how special a Mother is until we lose her. Mothers are Love!!”…. R. J. Bendre (USA).

12. “THE PERSON BETTER THAN GOD IS CALLED MOTHER.”….. रमन (USA)

अब्राहम लिंकान ने कहा है…”I remember my mother’s prayers and they have always followed me. They have clung to me all my life. “

हमने देखा कि “माँ” शब्द का अर्थ कितना गहरा है. जिसे हर व्यक्ति अपने तरीके से देखता है. दर्द होने पर या मुसीबत में सबसे पहले यदि कोई शब्द याद आता है तो वो है … “माँ”…..

एक स्पेनिश कहावत है जो माँ शब्द के अर्थ को सरलता से हमारे सामने रखती है….”An ounce of mother is worth a ton of priest.”

इस दुनिया में माँ के योगदान और आशीर्वाद की कोई कीमत नहीं है…. क्योंकि माँ ने इनकी कभी कीमत ही नहीं लगाई…

अभिलाषा शिवहरे गुप्ता

अप्रैल २०…. २०१२

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satyavrat shukla के द्वारा
May 2, 2012

अभिलाषा जी ,नमस्कार …बहुत ही अच्छा लेख है|वैसे तो माँ के लिए कोई भी लेख कम पड़ जायेगा |इस सम्पूर्ण शब्द को हम शब्दों में प्रतिबंधित करके व्याख्या ही नहीं कर सकते |आपका प्रयास सराहनीय है |आपने अपने विचारों और दूसरों की प्रतिक्रियाओं को बहुत ही अच्छे से आलेखित किया है |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 2, 2012

भयानक प्रसव पीड़ा से गुज़र कर भी बच्चे का मुह देखकर खुश हो जाती है. बच्चे की सुविधा के लिए गीले पर सोया करती है और बच्चे को सूखे बिस्तर पर सुलाया करती है . धूप में अपने अंचल को फैलाकर उसके लिए छाया करती है. रात-रात भर जाग कर उसे सुलाने कि कोशिश किया करती है.. अभिलाषा जी स्वागत है आप का इस मंच पर ..माँ पर जितना भी लिखा जाये कम है माँ ममता का सागर है उसका प्रेम बच्चे के लिए सर्वोपरि है माँ अतुलनीय है …बहुत सुन्दर लेख आप का .. एक माँ ही माँ को अच्छे से समझ भी सकती है …हम सब तो कल्पना ही कर सकते हैं और माँ से जो मिला है उस को आजीवन नहीं भूल सकते ..विभिन्न लोगों का आप ने उदहारण भी दिया …सुन्दर … भ्रमर ५

rekhafbd के द्वारा
May 2, 2012

अभिलाषा जी ,”उसको नहीं देखा हमने कभी ,पर उसकी जरूरत क्या होगी ,ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी ,ऐ माँ |बहुत बढ़िया लेख ,आभार

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 2, 2012

    धव्यवाद रेखा जी… आपने “माँ” शब्द को २ पंक्तियों में सार्थक बना दिया.. बहुत बढ़िया…

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 3, 2012

    रेखा जी…आपने “माँ” की तुलना भगवन से बहुत ही सुन्दर तरीके से की है… बहुत हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ है… मुझे ये पंक्तियाँ बार-बार पढ़ने को दिल करता है…

Mohinder Kumar के द्वारा
May 2, 2012

अभिलाषा जी, मां वह स्नेहमयी स्पर्श है जिसके संपर्क में हर कोई सबसे पहले आता है. “मां” पर लिखे आपके भावपूर्ण लेख के लिये आभार.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 2, 2012

आदरणीया अभिलाषा जी, सादर. मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में. माँ के जाने के बाद मैं उनके बताये मार्ग और सिद्धांतो को मूर्त रूप देता हूँ. वो मेरे साथ सदेव है. बधाई. लोग नानी याद दिलाते हैं आपने माँ याद दिला दी.

dineshaastik के द्वारा
May 2, 2012

अभिलाषा जी मेरा मानना है कि माँ बनना ईश्वर बनने जैसा है। मैं तो नहीं बन सकता ईश्वर। हाँ जब भी माँ की छवि स्मृति में आती है तो यही विचार उठता है मन में कि शायद  ईश्वर ऐसा  ही होगा, ऐसा ही नहीं बल्कि यही इश्वर होगा। समझ  में नहीं आता कि माँ के होते हुये लोग मंदिर क्यों जाते  हैं। बहुत ही सुन्दर आलेख  के लिये बधाई….

vikramjitsingh के द्वारा
May 1, 2012

अभिलाषा जी….सादर…. सुन्दर एवं सार्थक प्रस्तुति….. शुभकामनायें……

चन्दन राय के द्वारा
May 1, 2012

अभिलाषा जी , माँ को समर्पित आपके आलेख की ममतामई भावना की जितनी तारीफ़ कर पाऊं कम है , में तो इतना कन्हुंगा , मेरे कंठ से फूटता सबसे पुण्य पावन उच्चारण है “माँ”  

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 1, 2012

    धन्यवाद् चन्दन जी… सही कहा आपने, “माँ” … कितना पावन व् विभिन्न गहरे अर्थों से भरा है ये शब्द… जितना लिखा जाये “माँ” के बारे में कम है… मेरी स्मृति पटल पर अभी भी बहुत सामग्री है लिखने के लिए, पर लेख कही न कही तो ख़त्म करना होगा….

sheetal के द्वारा
May 1, 2012

अभिलाषा जी नमस्ते, आज आपके विचार एक माँ के बारे में पढके मेरा मनन भर आया, मुझे आज एक बात महसूस हुई के जब हम बच्चे होते है हम अपनी माँ को कितना तंग और परेशान करते है और हमारी माँ हमारी शैतान्नियो को माफ़ कर देती है, पर हमें इस बात का अहसास तब ही होता है जब हमे अपने बच्चे परेशान करते है आज आपका यह इतना “ममता भरा” ब्लॉग पढके मुझे अपने माँ की बड़ी याद आ रही है बड़े ही बदनसीब होते है वो बच्चे जिन्हें माँ का प्यार नसीब नहीं होता आपने बोहोत ही बढ़िया तरीके से व्यक्त किया है एक माँ का विवरण , युही लिखते रहिये आपके अगले ब्लॉग का इंतज़ार रहेगा….

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 1, 2012

    शीतल जी..बिलकुल सही कहा आपने…. माँ बनाने का सुख माँ बनाने पर ही समझ आ ता है… इसीलिये कहा गया है की, किसी के सुख या दुःख के हम तभी समझ सकते है, जब हम अपने आप को उनकी जगह पर dekhate है या rakhte है…. dhanywad

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 30, 2012

अभिलाषा जी, नमस्कार बहोत सुन्दर ढंग से चरणबद्ध आपने माँ की महिमा को दिखलाया है…………..हालांकि यह दिखलाने का आधुनिक ढंग है किन्तु जो भी हो नयी सकारात्मक चीजों को पढने में अच्छा लगता है……..बहोत सुन्दर लिखते रहिये


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