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जंग भ्रष्टाचार की......मै अन्ना हूँ

Posted On: 25 Apr, 2012 Others में

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कृपया इस लिंक को क्लिक करे… इस कविता की क्रांति को साक्षात् महसूस करने के लिए….

http://www.youtube.com/watch?v=jUH15VxfQR8

क्या-क्या न ढा गया भ्रष्टाचार ये,
कहाँ-कहाँ न छा गया भ्रष्टाचार…..

भ्रष्टाचार के खिलाफ, अब छिड़ी है जंग,
होने न देना इस चेतना को, खंडित और बेरंग.

मर गई थी लोगों की, चेतना इस कदर,
आज भारत जागा है, सबको हुई खबर.
अन्ना की आवाज़ ने, हमें बनाया है निडर,
अन्ना के ही चर्चे है, अब देखो ये ग़दर.

मुफ्त के मिले पैसों को, हक की तरह वसूलने वालों,
कम न समझना हम नागरिकों को,
अपने कर्तव्यों को पहचानो.
अपने किये गुनाहों को अब तो तुम स्वीकारो.
वरना जीवन के अंतिम क्षणों में,पड़े न तुमको पछताना,
इसी जीवन में स्वर्ग नरक है,
अब प्रायश्चित कर ही डालो.

यह क्षण ऐतिहासिक स्मृतियाँ होंगी,
नागरिकों की सक्रियता ही,
इस भारत की कृतियाँ होंगी.
हमारे दृढ संकल्प ही,
इसी भारत की उपलब्धियां होंगी.

अब न बैठेंगे हम हाथ पर हाथ रखकर,
लेंगे उनसे एक-एक पैसे का हिसाब,
ताकत, नियत, साहस रखकर,
लड़ते रहेंगे हम बिंदास.

” भारतीयों … इस आशा की किरण को बुझाने न देना.”
धन्यवाद्
अभिलाषा शिवहरे
१७/८.२०११

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 2, 2012

इस जंग में पूरा देश आपके साथ है. बधाई.

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 1, 2012

अभिलाषा जी, नमस्कार अत्यंत ही सुन्दर कविता………….निश्चय ही मेरे दृष्टि में नहीं आई थी. भ्रष्टाचार से लड़ने की एक अनोखी पहल…………..ख़ास कर आपकी यह बात लड़ते रहेंगे हम बिंदास……………..बिलकुल लड़ते रहना है…………….सुन्दर कविता पर बधाई

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 1, 2012

    धन्यवाद् आनंद जी…. attached video link देखिये… जो कविता की शुरुवात में ही है… क्रांति के महसूस कीजिये… बिंदास होने के लिए यह बहुत ज़रूरी है..

sheetal के द्वारा
May 1, 2012

नमस्कार अभिलाशाजी, सही मानो में हमारे देश में एक ऐसा सैलाब आना चाइये जो ब्रश्ताचार को हमारे देश से जड़ से उखाड़ कर ले जाए….मेरे विचार में तोह काश किसी तरह यह आपकी लिखी हुई कविता हमारे देश में बैठे ब्रश्ताचारियो के पास पोहोच जाए….बोहोत ही खूब लिखा है

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 1, 2012

    धन्यवाद् शीतल जी… ये आग जब ज्वाला बन जाएगी… तो उस ज्वाला में सभी भ्रष्टाचारी जल कर राख हो जायेंगे… आइये हम सब मिलकर इस ज्वाला को इतना धधकाएँ, की वो दिन जल्दी आये….


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