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मेरा अनुभव.... मातृत्व....

Posted On: 25 Apr, 2012 Others में

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मातृत्व…. मातृत्व कुदरत का दिया एक ऐसा उपहार है जिसे पाकर हर स्त्री धन्य हो जाती है. माता बनना एक स्त्री की सम्पूर्णता सिध्ह करता है और मातृत्व एक ऐसा अनुभव है, जिसे हर स्त्री महसूस करना चाहती है. जब मै पहली बार मेरे बेटे की माँ बनी , तो मुझे महसूस हुआ……

जब तुम्हारा जन्म हुआ, मै तो तुम्हे कुछ दे न सकी , पर तुमने मुझे जन्म दिया… एक माँ को जन्म दिया….मुझे तुमसे एक नयी पहिचान मिली..

तब भी मुझे लगता था कि तुम मेरी एक ज़िम्मेदारी हो.

लेकिन तुम्हारी एक टक आँखे जब मुझे निहारती थी,

तो मुझे महसूस हुआ कि मै कितनी धनवान हूँ!

उसके बाद…

जब तुमने मेरी जोर से उंगली पकड़ी,

तो मुझे तुमने महसूस कराया कि तुम्हे मेरी कितनी ज़रुरत है.

फिर…..

तुमने चारो तरफ सर घुमाना सीखा, जहा-जहा मै जाती तुम्हारी नज़रे मेरा पीछा करती…

तो मुझे लगा कि अब मै तुम्हारे इस छोटे से संसार का केंद्र बिंदु हूँ…

फिर…

तुमने आपनी मीठी, सुन्दर, बिना दांत की मुस्कराहट बिखेरी…वो सिर्फ इसलिए कि अब तुम मुझे पहचानने लगे थे ….

तब मुझे महसूस  हुआ कि तुम हमेशा मुझे अपने आस-पास देखना चाहते हो...

फिर…

तुमने आवाज़े देना सीखी… म.. म.. म …ब..ब..ब….यह सोचकर कि मै तुम्हे जवाब दूंगी… तुमने हमेशा मेरी आवाज़ सुनना चाही, चाहे वो मीठी हो या कर्कश…

इससे मुझे जान पड़ा कि तुम मुझसे कितना प्यार करते हो…

बेशक तुम्हे रोना भी आता था…. कभीकभी रोया भी करते थे, क्योकि तुम्हे पता था कि मै ….तुम्हारी माँ  तुम्हारे रोने का कारण समझेगी...

तब मुझे एहसास हुआ की तुम मुझ पर कितना विश्वास करते हो..

इश्वर ने  मुझे तुम्हारे योग्य क्यों बनाया…ये तो मुझे पता नहीं… लेकिन तुम भगवन से मिला सबसे अच्छा उपहार हो..तुम्हे देखकर मुझे ऐसा लगता है कि भगवन मुझे कितना चाहते है, जो उपहार में मुझे तुम मिले…

अभिलाषा गुप्ता

मार्च २, २०१२.

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 2, 2012

निश्चय ही स्त्री के लिए जीवन का अनमोल तोहफा है. जिन बच्चों की माँ नहीं है उनकी भी ऊँगली पकडिये sukh doona ho jayega.बधाई.

sheetal के द्वारा
April 28, 2012

अभिलाषा जी बोहोत ही सरल और बढ़िया तरीके से आपने वताक्त किया है एक माँ का अनुभव मुझे यकीन है जिस किस्सिने भी इससे पढ़ा होगा उन्हें अपने माँ होने का पहला अनुभव ज़रूर याद आया होगा..

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 1, 2012

    धन्यवाद् शीतल जी… ये अनुभव है ही अनोखा… जिसे माँ बार-बार याद करना चाहती है.

Mohinder Kumar के द्वारा
April 25, 2012

अभिलाषा जी, एक मां के मन के बिचारों को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में बयान किया है. लिखते रहिये.


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